हरतालिका तीज 2025: पूजा मुहूर्त, महत्व और व्रत कथा
हरतालिका तीज व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन और अविवाहित दोनों महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए सबसे पहले इस व्रत का पालन किया था। इसी कारण इस दिन को सुहाग की रक्षा और उत्तम वर की प्राप्ति का पर्व कहा जाता है।
हरतालिका तीज 2025 तिथि और मुहूर्त
तिथि प्रारंभ – 27 अगस्त 2025, सुबह 09:45 बजे से
तिथि समाप्त – 28 अगस्त 2025, प्रातः 08:20 बजे तक
पूजा का शुभ मुहूर्त – 27 अगस्त को रात्रि में निशीथ काल सबसे उत्तम माना जाएगा।
व्रत का दिन – 27 अगस्त 2025 (बुधवार)
गौर करने वाली बात है कि इस वर्ष दोपहर तक चतुर्थी तिथि भी लगने लगेगी, लेकिन शास्त्रों के अनुसार तृतीया तिथि का जो भाग प्रमुख होता है, उसी समय पूजा और व्रत करना शुभ माना जाएगा।
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हरतालिका तीज का महत्व
1. सौभाग्य की प्राप्ति – विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं।
2. अविवाहित कन्याएँ – माता पार्वती की तरह उत्तम वर की प्राप्ति के लिए इस दिन का उपवास रखती हैं।
3. पार्वती-शिव का मिलन – धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया और उसी का स्मरण यह व्रत है।
4. आध्यात्मिक शांति – उपवास और पूजा से मन की शुद्धि होती है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हरतालिका तीज व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर घोर तपस्या कर रही थीं। उनके पिता ने जब उनका विवाह भगवान विष्णु से करने की तैयारी की, तो माता पार्वती की सहेलियों ने उन्हें वन में ले जाकर छिपा दिया। उसी दिन उन्होंने निर्जल उपवास रखते हुए रेत की शिव-पार्वती प्रतिमा बनाकर भगवान शिव की आराधना की। उनकी कठोर तपस्या और अटूट श्रद्धा देखकर शिवजी प्रसन्न हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से इस व्रत को "हरतालिका तीज" कहा जाने लगा।
पूजा विधि
1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3. कलश स्थापना कर उसमें जल, आम्रपल्लव और नारियल रखें।
4. सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, बिंदी आदि) अर्पित करें।
5. निर्जला उपवास रखते हुए माता पार्वती को लाल वस्त्र और श्रृंगार सामग्री चढ़ाएँ।
6. हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें और सुहागिन महिलाओं को वस्त्र, श्रृंगार और मिठाई का दान करें।
7. रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करें और अगले दिन व्रत का पारण करें।
हरतालिका तीज पर विशेष परंपराएँ
महिलाएँ इस दिन मेहंदी रचाने और श्रृंगार का विशेष महत्व मानती हैं।
जगह-जगह सामूहिक पूजा और कीर्तन का आयोजन होता है।
विवाहित महिलाएँ अपनी सास या जेठानी को सिंधारा देती हैं जिसमें श्रृंगार सामग्री, कपड़े और मिठाई शामिल होती है।
कई क्षेत्रों में इस व्रत के दौरान महिलाएँ लोकगीत गाती हैं और पारंपरिक नृत्य करती है।
निष्कर्ष
हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि पति-पत्नी के अटूट बंधन और स्त्रियों की आस्था का प्रतीक है। 2025 में यह व्रत 27 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत करने से माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि, प्रेम और सौभाग्य का वास होता है।

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